Wednesday, November 19, 2008

नैसर्गिक भावः

जिस तरह धरती का वजूद है उसके होने में
और आसमान वजूद है उसके न होने में
शायद उसी तरह मेरे प्यार का वजूद है उसके होने में
और तुम्हारे इकरार का वजूद है उसके न होने में

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