समय की दिवार पे चढ़ के थोडा झांके
वो देखो दानी guitar बजा रहा है
वो देखो सुहास गाना गा रहा है
वो देखो समीर कितना शांत खड़ा है !
वो देखो खंडेलवाल bike पे सैनी की परछाई बिठा के लाया है
वो देखो टूटू पान अकेले खा रहा है
मत डरो ये तो बस बंग पलट के देख रहा है
वो समय भी गुजर गया और ये घड़ियाँ भी बीत गयीं
जो ठहरा है वो हम हैं और हमारा प्यार है
जरा ऊपर देखे वो आसमान में रवि है
नहीं हमारा Ravi Jain है
God Bless All of You My Dear
Saturday, December 3, 2011
Lakirein
लकीरें बुन कर मन बनाता हूँ
ये जो उलझे से हैं किनारों पे
ये उलझने नहीं
पंखुरी उम्मीदों की हैं
यहाँ वहां पुरे तन-मन को ओड़े पड़ी हैं
ये जो उलझे से हैं किनारों पे
ये उलझने नहीं
पंखुरी उम्मीदों की हैं
यहाँ वहां पुरे तन-मन को ओड़े पड़ी हैं
Tasir
बादलों में इतनी कशिश होती है
तासीर कभी बिजली कभी पानी होती है
पर ये तो शायरों की बातें हैं
हमने तो बिजली की डोरी बनाई है
उसपे आसमान की पतंग उड़ाई है
तासीर कभी बिजली कभी पानी होती है
पर ये तो शायरों की बातें हैं
हमने तो बिजली की डोरी बनाई है
उसपे आसमान की पतंग उड़ाई है
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